Saturday, 30 November 2013

बा-रहम "तन्हा" दे दे इक जाम और.....!!




उठता है धुँआ कैसा मेरे सीने में !
फ़िर लग गई नज़र मेरे पीने में !!

गर ख़ुदा है साथ तो डरना कैसा !
चलो बैठ के पियेंगे हम मदीने में !!

लाता हो पैग़ाम वो शैख़ कहीँ !
तर--तर है ज़िस्म फिर पसीने में !!

इलाही ! डगमगाती है ये कश्ती क्यूँ !
क्या जल्वागर हो गए वो सफ़ीने में !!

लाता है साक़ी भर आब--जम-जम !
उठो ! दौड़ो ! रक्खो ! प्याले क़रीने में !!

बा-रहम "तन्हा" दे दे इक जाम और !
बुझा लूँ आग मुददत की लगी सीने में !!

-          " तन्हा " चारू !!
-           
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


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