Saturday, 23 November 2013

कल रात मेरे आँगन में....... !!!




कल रात मेरे आँगन में ; कुछ सूखे फूल मिले !
एक "तन्हा" चाँद मिला ;किस्से नामालूम मिले !!

बर्फ़ सी चादर फैली थी ; दूर सूखे बरगद पर  !
सपना सिर्फ एक मिला ; जाने कितने शूल मिले !!

अंधियारी काली घटायें ; छा रहीं थी अंबर पर !
हादसा तो सिर्फ एक हुआ सपने सारे धूल मिले !!

परत दर परत खोला ; एक कागज़ मैला सा  !
तेरी मेरी ज़ुदाई के फिर सबब माक़ूल मिले  !!

                                         - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

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