Friday, 29 November 2013

तेरी आँख से छलका वो मोती,,,,,,,,,,,!!







तेरी आँख से छलका वो मोती, दामन में मेरे गर आता  !
क्या कोई क़यामत हो जाती, जो आँचल मेरा भर जाता !!

किस्मत की क्यों मैं बात करूँ, मुमक़िन है ये भी हमदम !
जो साथ तेरा नसीब होता, ये चाँद भी "तन्हा"घर जाता !!

भूलूँ कैसे  माहताब की बातें, तारों की राते, शबनम का साथ !
कोई ग़िला तो ऐसा रख जाता, कोई काम तो ऐसा कर जाता !!

अच्छा है जो तूने हरदम, किया रुसवा मोहब्बत को !
वर्ना देख मेरा चाकगिरेबाँ, इल्ज़ाम ये तेरे सर जाता !!

हाय !मेरे अहबाब तुमने , कैसी नाफ़रमानी कर डाली !
कहते हैं अब रकीबों से वो, अच्छा है "तन्हा"मर जाता !!

-          " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


5 comments:

  1. kya khoob, zara iska saal bhi darj kar den!

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  2. itni lajavab rachnaon ke sath apna rachna-kaal bhi dalen to hamen pata chalega ki yah shayar kis zamaane se ek UMDA shayar hai!!

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  3. बहुत कुछ ऐसा है जो यहाँ - वहाँ बिखरा पड़ा है ! बस अभी तो सब समेट रहे हैं !! आगे से नई क़लम पे तारीख़ ज़रूर दर्ज़ कर देंगे !!!

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