Sunday, 24 November 2013

देखो यारो ! अंजुमन में कौन बारहां रोता है !





देखो यारो ! अंजुमन में कौन बारहां रोता है !
सुनके जिसको जिस्म पसीने दिल पत्थर का होता है !!

तसल्लियों से रखूँ  नाता इतना मुझको होश कहाँ !
देख के तेरा ख़ाली दामन चारोँ पहर दिल रोता है !!

किस रंजिश से पूंछूं जा कर सबब उसके जख्मों का !
रंजिश की शह को पाकर कुछ दर्द जवाँ तो होता है  !!

गमनीन मोहब्बत में होना धीरे से हॅसना फिर रोना !
ऐसे हादसे देख - देख के अपना हौसला खोता है  !!

तेरे लबों को छू कर देखूँ मैं अपनी इन आँखों से  !
देखो " तन्हा "ख्वाब सुहाने अश्कों में डुबोता है !!

                                             - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

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