Tuesday, 26 November 2013

राज़-ए-दिल करे ये नुमायाँ कोई !!

राज़--दिल करे ये नुमायाँ कोई !
तेरे शहर में रहे पराया कोई !!

सितम आज़माने की कोशिश में !
मुझे "तन्हा" करे बुलाया कोई !!

रब से करता हूँ मैं दुआ इतनी  !
अब उसको करे सताया कोई !!

सादगी पे मर मिटे हम उसकी !
राज़ उससे जाये छुपाया कोई !!

बुलाने पे कतराता हूँ ये सोच कर  !
अब मिल जाये हमसाया कोई !!

डरता हूँ गुजरते कूँ - -यार से !
कहीं तेग़ जाये आज़माया कोई !!

नज़र रखता हूँ उस दरबार पे  !
जहाँ सर जाये उठाया कोई !!

ख़ुदा ख़ैर ! हूँ रु - -रु ख़ुदा याँ !
अब चिल्मन जाये गिराया कोई !!

बिखेरता हूँ किर्चे मैं दिल की अपने !
तेरी बज़्म से जाये ख़ुदाया कोई !!

लौट आया जहान- -यार से मग़र  !
बज़्म -- दीद में करे जाया कोई !!

अश्क़ों से भिगो देता हूँ ज़मीं ये सोच !
ख़ाक -- आरज़ू जाये उड़ाया कोई !!

क्या जाऊँ " तन्हा " तेरी मज़ार पे !
रूठा मुझसे जाये मनाया कोई  !!

-          " तन्हा " चारू !! 
-           
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!








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