Thursday, 14 November 2013

छोड़ के साथ मेरा अभी साये नहीं जाते !!!





छोड़ के साथ मेरा अभी साये नहीं जाते  !
जख्म दिल पे और अब खाये नहीं जाते !!

कहते हैं अपने दिल पर लगी हुई  !
भूले हुये और अब भुलाये नहीं जाते !!

बारहां है रूठे वो है बारहां मनाया  !
अबकी रूठे ऐसे कि मनाये नहीं जाते !!

चाहिये गर तुम्हे ले लो ये दिल मेरा  !
जान कसम  जाँ यूँ सताये नहीं जाते !!

जेरे-लब रहती है इक हँसी उसके  !
बिन बात मगर मुस्कराये नहीं जाते !!

रख लिहाज़ कुछ मरीज - -इश्क़ का  !
ख़त दिखा के उसके छिपाये नहीं जाते !!

रहने दो पड़ा यूँ ही सहन् में अपने  !
ख़त आशिक़ों के कभी जलाये नहीं जाते !!

उम्मीद तो रखता हूँ कि होंगे बाख़बर  !
वादे मगर उनसे निभाये नहीं जाते  !!

उलट दे नक़ाब कहीं वो इताब में  !
यूँ ही हम उनसे घबराये नहीं जाते  !!

ख़ुदा ख़ैर !आते है बज्म में बेनक़ाब वो !
परदे भी अब हमसे गिराये नहीं जाते  !!

लाते तो हैं ग़ुल चुन कर चमन से  !
लर्जिश--दस्त से वो चढ़ाये नहीं जाते!!

छलक आता है नूर यूँ ही कभी-कभार !
तंज़ मगर चेहरे पे लाये नहीं जाते  !!

कहता तो हूँ ग़ज़ल अपने अन्दाज़ की !
जुल्म मगर उनके गिनाये नहीं जाते !!

हैं कलाम अच्छे हैं अशआर अच्छे  !
ये शेर मगर साज़ पे गाये नहीं जाते !!

जायेंगे इक रोज़ हम भी महफ़िल में !
अभी लिहाज़ में हम बुलाये नहीं जाते !!

किस मुँह से जाऊँगा दैर - -हरम में !
कहते है वहाँ गैर--पराये नहीं जाते  !!

बेख़ुदी में करते हो कैसी ख़ुदी की बाते  !
ख़ुदा क़सम !ख़ुदा यूँ बहलाये नहीं जाते !!

जाते हैं बेख़बर सहर- -बुताँ में मगर  !
सनद हो !"तन्हा"बिन बुलाये नहीं जाते !!

                                                    -"तन्हा"चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!




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