Wednesday, 4 December 2013

इतनी सी कहानी और इतना सा फसाना है.......!!

इतनी सी कहानी और इतना सा फसाना है !
हर दर्द - -ज़िगर मेरा तेरा अफ़साना है !!

चन्द पैबन्द इक चाक -ज़िगर अपना !
क्या खूब तूने मुझे दिया नज़राना है !!

हाय !मेरा इल्म शोखिये-तहरीर तेरी !
कल्म करने का मुझे तूने ढूंढा बहाना है !!

मज़ारे-उल्फ़त पे कभी इक फूल चढ़ा देना !
गर तेरे दिल में मेरा कहीं आशियाना है !!

ना-उम्मीद हो चला "तन्हा"देख कूँ - -यार से !
फिर ना कहना तुम मुझे उम्मीद पे ज़माना है !!

                                                - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


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