Thursday, 12 December 2013

जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!


हम को तो सताया सभी ने  तुम ना सताओ तो जानें ! 
जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!
                                     जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

थक के बैठा " तन्हा " करता हिसाब किन-किन बातों का !

तुम भी जुल्म ओ जफ़ाओं का हिसाब लगाओ तो जाने  !!
                                        जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

दिल की आग बुझा सकते हैं हम गम ओ मय पीने वाले !

ज़हन की तपती आग को अश्कों से बुझाओ तो जाने !!
                                   जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मिटा सकते हो नाम -ए -ग़म स्याह हर्फ़ दोहराने से भी !

इस दाग-ए-दिल-ए-स्याह को दिल से मिटाओ तो जाने !!
                                   जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

नाक़ाम मोहब्बत का होना कोई बड़ा मुक़ाम नहीं है !

अंजामें-मोहब्बत की कोई दास्तान सुनाओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मुंतज़िर -ए -पैग़ाम अब मेरी आदत में शुमार है  !

जवाबे -वहशत में सनम की लाश भिजवाओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मंज़िल - मंज़िल दर - दर पे "तन्हा" तन्हा देखा है !

तुम भी शिकस्ता -ए -दिल का दर्द आज़माओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

                                                      - " तन्हा " चारू !!

                                                          11 - 02 -1997  
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


2 comments:

  1. आपके हर हर्फ में कुछ बात तो है!! पढ़ें तो जानें :-)

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    1. अब ना रहे वो पीने वाले ; अब ना रही वो मधुशाला !!

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