Saturday, 21 December 2013

क्या हुआ आज जो सर पे मेरे ताज़ नहीं है !!



क्या हुआ आज जो सर पे मेरे ताज़ नहीं है !
नहीं मुझ "तन्हा" को इसपे एतराज़ नहीं है !!

लिखता हूँ कलाम लहू-ए-ज़िगर से अपने !
मेरा फ़न तेरी दाद का मोहताज़ नहीं है !!

फितरत-ऐ-शायर की नहीं अब फिक्र मुझे !
है फिक्र शायरे-वतन मेरा हमराज़ नहीं है !!

आये इन्क़लाब कभी है ख्वाहिश मेरी ये  !
मग़र वतन में मुझसा कोई जां-बाज़ नहीं है !!

कैफ़-ऐ-कलाम में हो न क्यूँ बू-ए-इंकलाब !
रूह-ऐ -कलाम अब कोई मुमताज़ नहीं है !!

कल्म करते हो किसलिये ये ज़ुबान मेरी !
ज़ुंबिश तो है हांथों में जो आवाज़ नहीं है !!

दिल में आतिश औ कफ़न कांधों पे अपने !
सरकशी का अंज़ाम अब कोई राज़ नहीं है !!

खेलता हूँ "तन्हा" खूँ औ जाँ बाज़ी अपनी !
बता ऐ हिन्द ! क्या तुझे मुझपे नाज़ नहीं है !!

-          " तन्हा " चारू !!
                                         18-02-1997  
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!




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