Monday, 16 December 2013

पहरे में तितलियाँ मुझे नाग़वार हैं !!



फ़िज़ा-फ़िज़ा में मस्त सबा का ख़ुमार है !
रंगीनिये -चमन तो यहाँ बेशुमार हैं !!

पाबन्दियाँ नाफ़िज़ अब सय्याद पर करो !
पहरे में तितलियाँ मुझे नाग़वार हैं  !!

रहमतें -ख़ुदा पे भवरा नहीं है आज !
खुदी में अपना वो परवरदिगार है  !!

निशाने -मंज़िल का पता पूछता है क्या !
ज़ुस्तज़ू पुर कैफ़ सबा पर सवार है  !!

कुर्बान हो क्यूँ मेरा दिल वतन !
फ़िक्र--चमन मेरी आदते-शुमार है !!

रखना चिराग अपने आँचल के तले !
रौशन जमाल--यार में गर्दे-ग़ुबार है !!

अंदेशा--हिज्र से घबरा जाये दिल !
राह - -वस्ल में खड़ा शह -सवार है !!

नाचार हूँ ये सोच के कि अब के बरस !
आई ये कैसी शब्--हिज्र --बहार है !!

दुश्वारी--तन्हा का क्या-क्या है सबब !
रंजे-ग़ुल, ख़लिशे-दिल, फ़स्ले-बहार है !!

-          " तन्हा " चारू !!
   12-02-1997
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


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