Tuesday, 24 December 2013

मेरे हाल-ए-दिल से पहले उन तक मेरे गम गये !




मेरे हाल-ए-दिल से पहले उन तक मेरे गम गये !
गये कहने रक़ीब पहले और फ़िर हमदम गये !!

मेरे रश्क-ए-ज़ाना के एहसानों में इक एहसान !
गये तीर-ओ-ख़ंजर पहले और फ़िर मरहम गये !!

मेरे दिल की पशेमानी , उन पेशानी पर वो बल !
गये रख वो लब-बः-लब मगर कुछ बरहम गये !!

मेरी रूसवाईयों का सबब जो पूछा बज़्म के रु-ब-रु !
मेरे कुछ कहने से पहले सबके दिल भी थम गये !!

मेरे दीद ओ दानिस्त में रक़ीब था पासबाँ नेरा !
साथ उसके क़त्ल को ख़ुद बराह-ऐ-करम गये !!

मेरे जुनूं की थी इंतहा एक और दीदार के वास्ते !
गये दफ्न से पहले वो और फिर मेरे दम गये !!

उसके सितम-ओ-जफ़ा के नहीं मानिन्द कोई "तन्हा"!
गो'या रंग-आमेज़ी से पहले निकाले पेंच-ओ-ख़म गये !!

                                            " तन्हा " चारू !!
                                               09-04-1995
 

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

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