Friday, 13 December 2013

कह न सके नज़र से भी नज़र की ही बात !!




आई है नज़र छू कर किसी शोख़ नज़र को !
छिपायें कहाँ अपनी मद - होश नज़र को !!

कुर्बान है नज़र उनकी नीची नज़र पे !
लगे नज़र उनकी पुर ज़ोश नज़र को !!

आईं हैं नज़र मुझको क़यामत की शोख़ियाँ !
लिल्लाह उन्हें देख सके एक नज़र को !!

कह सके नज़र से भी नज़र की ही बात !
"तन्हा"नज़र ढूँढ रहीं ख़ामोश नज़र  को !!


                                           - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

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