Wednesday, 11 December 2013

लब अपना ही कोई शेर गुनगुनायें हैं !!




पूछ इश्क में कितने जख्म खाये हैं !
जब चोट लगी दिल पे तो मुस्करायें हैं !!

वादे नातें कस्में शिक़वे वफ़ा प्यार जफ़ा !
कितने झूठे ये तेरी याद के सायें हैं !!

उसके छालों पे रक्खो कोई तो मरहम !
हो रूसवा तेरे दर से बहुत आयें हैं !!

कोई पूछे उसका हाल मेरे क़ासिद से !
ख़त जिसने बारहां पढ़ के सुनाये हैं !!

जब भी मसले है दिल नामुराद "तन्हा"
लब अपना ही कोई शेर गुनगुनायें हैं !!

-          " तन्हा " चारू !!
                                              19-01-1997
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!



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