Friday, 10 January 2014

चकोर की याद में है उदास चाँद भी !!!!




उम्र के 28 वे पायदान पर 1995 में डियर पार्क ( R.K.PURAM ) दिल्ली  में लिखी इक ग़ज़ल  As It Is .......


पहले एक शेर ....

चकोर की याद में है उदास चाँद भी !
मुफ़लिसी में फॅसा आज का इंसां भी !!

रक़ीबों की सोहबत का ये सिला है मिला !
थामे से थमा नहीं दौर -ऐ-तूफ़ान भी !!

...... ......
परिन्दे की परवाज़ का आग़ाज़ भी अंज़ाम भी !
असीरी में सय्याद के जान भी जहान भी !!

बाग़-ओ-ग़ुल के ख्वाब में दिल भी ईमान भी !
गिरफ्त में ज़ंज़ीरों की हसरत -ए-परवान भी !!

बाँजुओं में था कभी फ़लक भी उन्वान भी !
मुश्क़िलों में फँसी जान भी पहचान भी !!

रिहाई का तक़ाज़ा है दुश्वार भी आसां भी !
क़दम बा क़दम मिले राह भी बियावाँ भी !!

सीमतन के हाथों में तीर भी कमान भी !
क़त्ल करने को मुझे हुक्म भी फ़र्मान भी !!

सरकशी का सरंजाम सुब्हो भी शाम भी !
कल्म कर दो मेरा इल्म भी जुबान भी !!

रोता है ऐयारी पे अर्श भी असमान भी !
सलाख़ों में दफ्न है तन्हा-ऐ-एहसान भी !!

- " तन्हा " चारू !!
    25-02-1995

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


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