Saturday, 7 December 2013

तू " तन्हा " इन्सा जमीं पे मैं " तन्हा "ख़ुदा याँ.......!!

aap ki yaad ek anmol dharohar.... !!
 आप की याद इक अनमोल धरोहर ...... !!! 




देख़ सूरत - ए - हाल वो ग़मनाक हो गया !
हुआ शर्मसा इतना कि सुपुर्द-ए-ख़ाक हो गया !!

न सजाओं ज़िस्म-ए-फानी को गूलों लोबान से !
रूह फ़ना होने से "तन्हा" क्या नापाक़ हो गया !!
   
दोज़ख़ ओ ज़न्नत की न पूँछ हक़ीक़त साहिब !
देख जिश्त -ए -जहान  वो ख़ुदा बे-बाक हो गया !!

मिले जब बढ़ कर गले मोहत्सिब -ओ - रिन्द !
वाक़या रु- ब- रु-  ऐ- ख़ुदा शर्मनाक हो गया !!
  
पूछा इक सवाल ख़ुदा से हममे तुममे फ़र्क क्या !
बोला ऐ इंसान ! देख महज़ इत्तेफ़ाक हो गया !!

तू " तन्हा " इन्सा जमीं पे मैं " तन्हा "ख़ुदा याँ !
तेरे जुल्मों सितम पे याँ गिरेबाँ-चाक हो गया !! 

-          " तन्हा " चारू  !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!



2 comments:

  1. यादें हमेशा रहेंगी साथ!
    नमन!

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    1. धन्यवाद अनुपमा जी ! आपका सस्नेह आभार !!

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